Table of Contents
New Year Resolutions That Actually Stick: A Practical Guide for 2026
साल का वह समय फिर से आ गया है, जब हम अपने जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेते हैं-जिसे हम नए साल के संकल्प (New Year Resolutions) भी कहते हैं।
जब हम रुककर अपने जीवन की ओर देखते हैं और यह सोचते हैं कि क्या हम वाकई उस दिशा में बढ़ रहे हैं जहाँ जाना चाहते थे। नया साल आते ही उम्मीद, उत्साह और बदलाव की इच्छा अपने साथ कई संकल्प लेकर आती है।
हम खुद से कहते हैं कि इस बार सब अलग होगा-हम ज़्यादा फिट रहेंगे, ज्यादा पढ़ेंगे, कम फोन चलाएँगे, बेहतर निवेश करेंगे और अपने लिए समय निकालेंगे।
क्या आपने अपने 2026 के संकल्प घोषित कर दिए हैं?
“मैं हफ्ते में तीन बार जिम जाऊँगा।”
“मैं ज्यादा पढ़ूँगा।”
“मैं ट्रेकिंग पर जाऊँगा।”
लेकिन सच्चाई यह है कि जनवरी का जोश अक्सर फरवरी तक फीका पड़ जाता है और मार्च के आते-आते ज्यादातर संकल्प पिछले दरवाजे से चुपचाप गायब हो जाते हैं। इसका कारण यह नहीं है कि हम बदलना नहीं चाहते, बल्कि यह है कि हम बदलाव को केवल संकल्प समझ लेते हैं, जबकि असली ज़रूरत दृढ़ निश्चय की होती है।
लेकिन केवल संकल्प लेने से आगे बढ़कर दृढ़ निश्चय (resolve) के बारे में सोचना ही शायद वह समाधान है, जिससे आप अपने संकल्पों को पूरा कर सकें। संकल्प अक्सर बाहरी प्रेरणा से पैदा होते हैं-नया साल, सोशल मीडिया पोस्ट, किसी और की सफलता या समाज की अपेक्षाएँ। जबकि एक दृढ़ निश्चय, साधारण संकल्प से कहीं अधिक गहरी प्रतिबद्धता से होता है।
बदलाव के लिए गहरी प्रेरणा, साल के किसी एक दिन पर एजेंडा तय करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है। अंदर से यह समझना ज़रूरी है कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं, किस पर विश्वास करते हैं और किसके लिए प्रेरित हैं। बदलाव किसी एक तारीख से नहीं होता, बल्कि वह एक सतत प्रक्रिया है।
क्योंकि ऐसा नहीं है कि आप 31 तारीख या 1 तारीख को कोई फैसला ले लें और वही फैसला पूरे साल या आने वाले वर्षों तक अपने आप चलता रहे।
बदलाव तभी टिकता है जब वह आपके मूल्यों, आदतों और रोज़मर्रा के जीवन में धीरे-धीरे शामिल हो। यह रहा आपका एक आसान मार्गदर्शक, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जैसे-जैसे साल आगे बढ़े, आपके संकल्प ‘ब्रिजेट जोन्स’ की तरह बीच में ही न छूट जाएँ।
1. “मैं और सेहतमंद भोजन करूँगा”
लक्ष्य- बेहतर पोषण
लगभग हर साल लोग यह तय करते हैं कि वे जंक फूड छोड़ देंगे, सलाद खाएँगे और चीनी कम कर देंगे। शुरुआत में यह सबकुछ जोश के साथ शुरू होता है, लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह बोझ लगने लगता है।
2026 में अच्छी तरह खाने की आदत बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि आपका पोषण न तो बहुत ज़्यादा कठोर हो और न ही अनावश्यक रूप से जटिल। शरीर को वही चाहिए जो उसकी ज़रूरत है, और उसे संतुलन चाहिए।
अत्यधिक डिटॉक्स डाइट या लंबे उपवास से बचना चाहिए। धीरे-धीरे खाएँ, भोजन को अच्छी तरह चबाएँ, सही समय पर खाएँ, सही मात्रा में खाएँ, अपने शरीर के प्रकार के अनुसार मैक्रोज़ (कार्बाेहाइड्रेट, प्रोटीन या स्वस्थ वसा) का संतुलन रखें और कभी भी अपराधबोध के साथ भोजन न करें।
क्या कारगर है- भोजन की योजना बनाना।
आसान उपाय- पोषण को सरल रखें, भोजन को संपूर्ण (Whole) रखें।
2. “मैं काम घर नहीं लाऊँगा”
लक्ष्य- बेहतर कार्य-जीवन संतुलन
काम और निजी जीवन का संतुलन आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। तकनीक ने धीरे-धीरे काम को घर तक पहुँचा दिया है और घर को ऑफिस। वर्ष 2026 में यह निर्णय लेना चाहिए कि घर पहुँचने के बाद काम से पूरी तरह दूरी बनाना चाहिए।
यह आसान नहीं है, लेकिन यह ज़्यादा मानसिकता से जुड़ा है। छोटी-छोटी बातों की चिंता करना छोड़ देना चाहिए, टीम को ज़िम्मेदारियाँ सौंप देनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया कि सभी समझें कि काम के बाद का मेरा समय और वास्तव में उनका भी-बहुत महत्वपूर्ण है।
सबसे पहली और सबसे अहम सीमा एक ‘शटडाउन रिचुअल’ स्थापित करना है। अधिक काम करने वाले पेशेवर अक्सर ‘कॉग्निटिव ब्लीडिंग’ से पीड़ित होते हैं, जहाँ काम का तनाव घर के जीवन में भी घुस जाता है।
बस एक तय समय चुनें, जब आप शारीरिक रूप से अपना लैपटॉप बंद करें और अपने कार्य-स्थल को व्यवस्थित करें। यह प्रक्रिया आपके दिमाग को यह संदेश देती है कि अब मोड बदलना सुरक्षित है।
Digital Detox: मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से कैसे छुटकारा पाएं
क्या कारगर है- आराम करने को लेकर अपराधबोध महसूस करना बंद करें।
आराम ‘आलस्य का समय’ नहीं है, यह ‘ऊर्जा भरने का समय’ है। इसे अपनी टू-डू लिस्ट में शामिल करें।
आसान उपाय (Hack it)
एक ‘डिजिटल बफर ज़ोन’ बनाइए-अपने फोन के आख़री पेज पर सभी कार्य-संबंधी ऐप्स का एक फ़ोल्डर रखें, शाम 6 बजे के बाद नोटिफिकेशन साइलेंट कर दें, या फोन को खुद से शारीरिक रूप से दूर रखें।
3. “मैं एक नया कौशल सीखूँगा”
लक्ष्य- एक नई रुचि विकसित करना
किसी भी चीज़ को लगातार अपनाए रखने की यही कुंजी है-उस डोपामिन हिट को खोजना। जब लोग यह सोचते हैं कि वे कौन-सी आदतें बनाना चाहते हैं, तो हम अक्सर इसे इस तरह देखते हैं कि क्योंकि दूसरे लोग इसे कर रहे हैं, यह ‘आकर्षक’ लगती है।
आमतौर पर ऐसी आदतें टिकती नहीं हैं। किसी भी आदत के टिके रहने के लिए उसका अनुभव संतोषजनक और आनंददायक होना ज़रूरी है।
आदतें केवल अनुशासन से नहीं, बल्कि संतोष से बनती हैं। शुरुआत में इच्छाशक्ति ज़रूरी होती है, लेकिन लंबे समय तक वही आदतें चलती हैं जिनसे हमें खुशी मिलती है। जब कोई गतिविधि हमें बेहतर महसूस कराती है, तो उसे जारी रखने के लिए ज़्यादा ज़ोर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
क्या कारगर है-यह सोचना बंद करें कि कोई भी आदतें 31 या 365 दिनों तक लगातार ज़बरदस्ती करने से अपने-आप बन जाती हैं।
आसान उपाय (Hack it):-यह पुश नहीं, बल्कि पुल होना चाहिए। शुरुआत में इच्छाशक्ति की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन इसके बाद केवल इच्छाशक्ति को ही आगे बढ़ने की एकमात्र ताकत मानकर न चलें-उससे आगे सोचें।
4. “मैं अपने फोन पर कम समय बिताऊँगा”
लक्ष्य- स्क्रीन टाइम कम करना
फोन पर कम समय बिताने का संकल्प आज लगभग हर किसी की सूची में होता है। हम जानते हैं कि ज़्यादा स्क्रीन टाइम हमारी एकाग्रता, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, फिर भी हम बार-बार उसी चक्र में फँस जाते हैं। लगभग अधिकांश लोग कुल मोबाइल उपयोग कम करने और सोशल मीडिया पर बिताये जाने वाले समय को घटाने की योजना बना रहे हैं।
इसका कारण यह है कि फोन केवल एक उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि वह भावनात्मक सहारा भी बन चुका है। इसलिए इसे कम करने के लिए खुद को दोषी ठहराने की बजाय अपनी आदतों को समझना ज़रूरी है। व्यक्ति को यथार्थवादी लक्ष्य तय करने चाहिए।
हमें 5C पद्धति का उपयोग करके हानिकारक/अस्वस्थ उपयोग के संकेत (रेड फ्लैग) को पहचान सकतेः-
लालसा (Craving): “मुझे अभी अपना फोन इस्तेमाल करना ही है।”
नियंत्रण की कमी (Loss of control): “शुरू करने के बाद मैं रुक नहीं पाता।”
बाध्यता (Compulsion): “मुझे लगता है कि मुझे इसका उपयोग करना ही पड़ेगा।”
निपटने का तरीका (Coping): “मैं बेहतर महसूस करने के लिए इसका उपयोग करता हूँ।”
परिणाम (Consequences): “यह मेरे जीवन को प्रभावित कर रहा है।”
इसके साथ-साथ, अपने स्क्रीन उपयोग पर नज़र रखना-आप कौन-से ऐप्स सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, किन गतिविधियों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, कितनी बार और किस समय फोन देखते हैं-ये सब मिलकर आपके लिए एक व्यक्तिगत योजना बनाने में मदद करेंगे।
यह भी पढ़े The Power of Words
क्या कारगर है-
प्रेरक संकेतों को सीमित करना-जैसे नोटिफिकेशन बंद करना या ऐप्स छिपाना, फोन को साइलेंट रखना, टाइमर सेट करना, टेक्नोलॉजी-फ्री ज़ोन बनाना और डिजिटल स्वच्छता अपनाना-यानी जागने के तुरंत बाद और सोने से पहले फोन का उपयोग न करना।
आसान उपाय (Hack it):
फोन की जगह लेने वाली गतिविधियाँ अपनाएँ-जैसे क्रोशिया, बुनाई, ड्रॉइंग, पेंटिंग जैसे शौक, और योग व जर्नलिंग जैसी आत्म-देखभाल गतिविधियाँ। जो आपके लिए कारगर हो, उसे चुनें।
5. “मैं कम खरीदारी करूँगा”
लक्ष्य- समझदारी से खरीदारी (माइंडफुल शॉपिंग)
खरीदारी को लेकर भी यही सिद्धांत लागू होता है। आवेग में की गई खरीदारी अक्सर कुछ समय बाद पछतावे में बदल जाती है। समझदारी से खरीदारी का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को हर चीज़ से रोक लें, बल्कि यह है कि आप अपनी ज़रूरतों और जीवनशैली को समझकर फैसले लें। वार्डरोब का ऑडिट किया जाना चाहिए।
क्या आपका वार्डरोब आपकी जीवनशैली को दर्शाता है? अपने वार्डरोब को देखकर आपको यह समझ आ जाना चाहिए कि आप किस तरह के व्यक्ति हैं। इससे आप मौके के लिए खरीदे जाने वाले कपड़े (ऑकेज़न ड्रेसेज़) खरीदने से बचते हैं, जो उपयोग में सीमित होते हैं।
अपनी गलतियों से सीखने के लिए वार्डरोब ऑडिट बेहद ज़रूरी है।
क्या कारगर है-खरीदारी से पहले खुद से सवाल पूछना-
क्या आप इसे साल में कम से कम 20 बार पहन पाएँगे?
क्या यह कपड़ा आपके वार्डरोब की कम से कम तीन अन्य चीज़ों के साथ मेल खाता है?
और क्या आपको इसकी वास्तव में ज़रूरत है?
आसान उपाय (Hack it):
जैसे रोज़ाना डायरी लिखने की सलाह दी जाती है, वैसे ही अपनी चीज़ों की एक सूची/जर्नल बनाएँ-यह डिजिटल भी हो सकती है-इससे रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद मिलती है।
6. “मैं चीज़ें जमा नहीं करूँगी”
लक्ष्य- अव्यवस्था कम करना (Decluttering)
“इसे कहाँ रखा जाएगा?” और
“क्या हमें वाकई इसकी ज़रूरत है?”
ऐसे सवाल अक्सर वही लोग पूछते हैं जो अपने घर या जगह को व्यवस्थित करना चाहते हैं।
छोटे और कम तनाव वाले काम से शुरुआत करें-ऐसी जगह से जहाँ आपको जल्दी परिणाम दिखें, जैसे रसोई की कटलरी दराज़ या बेडसाइड दराज़-ऐसी चीज़ें जो आप अक्सर इस्तेमाल करते हैं लेकिन जिनसे भावनात्मक लगाव गहरा नहीं होता।
जब हर वस्तु की एक तय जगह होती है और उसे इस्तेमाल के बाद वहीं रखा जाता है, तो घर अपने-आप व्यवस्थित रहने लगता है।
यह तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि आपको जल्दी, स्पष्ट परिणाम दिखाई देते हैं, जिससे तुरंत उत्साह बढ़ता है। यह बोझिल लगने के बजाय संभालने योग्य लगता है और भावनात्मक निर्णय भी कम होते हैं, जिससे आप अटकते नहीं हैं।
क्या काम करता है-
घर की हर वस्तु के लिए एक तय और लेबल की हुई जगह होना चाहिए और अगर कोई चीज़ बाहर निकालें, तो उसे वापस उसी जगह रखें।
आसान उपाय (Hack it):-
जैसे आपकी कामों की टू-डू लिस्ट होती है, वैसे ही हफ्ते के अलग-अलग दिन घर के अलग-अलग हिस्सों या ज़ोन के लिए तय करें।
उदाहरण के लिए-रसोई में सोमवार को पेंट्री में रखी एक्सपायर्ड चीज़ें जाँचें, मंगलवार को काँच की अलमारियाँ, आदि।
7. “मैं दौड़ना शुरू करूँगी”
लक्ष्य- फिटनेस
फिटनेस एक लंबी यात्रा है, कोई त्वरित प्रतियोगिता नहीं। धीरे-धीरे शुरुआत करना, अपनी गति को समझना और निरंतरता पर ध्यान देना इस संकल्प को टिकाऊ बनाता है। बिना किसी पारंपरिक ‘रिज़ॉल्यूशन ड्रामा’ के।
खुद पर ज़रूरत से ज्यादा दबाव न डालें। ज़्यादातर लोग इसलिए बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि वे बहुत ज़्यादा, बहुत तेज़ बदलने की कोशिश करते हैं-जैसे हफ्ते के सातों दिन जिम जाने की योजना या सब-कुछ-या-कुछ-नहीं वाले लक्ष्य।
इसके बजाय, धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए और रनिंग को क्रमशः धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और समय के साथ निरंतरता को मजबूत होने देना चाहिए। न कोई दबाव, न थकान। बस छोटे, संभालने योग्य बदलाव जो वास्तव में टिकते हैं। एक-एक आसान दौड़ के साथ आप सड़कों पर जीत हासिल कर सकते है।
क्या काम करता है-
एक सिद्धांत है कि लोग दौड़ना इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि वे बहुत तेज़ दौड़ते हैं और जल्दी थक जाते हैं।
प्रो टिप- जितना आपको लगता है, उससे थोड़ा धीमा दौड़ें।
आसान उपाय (Hack it):-
प्रगति को ट्रैक करने के लिए किसी ऐप का उपयोग करें और हर दिन खुद को थोड़ा-सा आगे बढ़ाएँ।
8. “मैं यात्रा के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखूँगा”
लक्ष्य- भोजन में अनुशासन (Food Discipline)
इस साल के लिए एक सरल संकल्प लिया है-यात्रा के दौरान समझदारी से खाना। लगातार कई दिनों तक यात्रा और होटल में ठहरने से अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा ऑर्डर करने की आदत पड़ जाती है, इसलिए 2026 में पूरी तरह रूम सर्विस छोड़ने का फैसला लेना चाहिए। यह एक ऐसा संकल्प है जो छोटे निर्णयों से निभाया जा सकता है।
इसका तर्क सीधा है-कम लुभावने मेनू, कम अतिरिक्त डिश, और कम ज़्यादा खाना। यात्रा के दौरान स्वस्थ रहना कठिन होता है और ऐसे छोटे, सचेत निर्णय चुपचाप बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
क्या काम करता है-
होटल ज़्यादा खाने को आसान बना देते हैं, इसलिए चेक-इन करते ही रूम सर्विस का मेनू दराज़ में रख देना कोई बुरा विचार नहीं है।
आसान उपाय (Hack it):-
बुफे छोटे हिस्सों तक सीमित रहने का अच्छा तरीका हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए लालच और पोर्शन साइज पर नियंत्रण रखना ज़रूरी है।
9. “मैं और पढ़ूँगा”
लक्ष्य- अधिक किताबें पढ़ना
किताब के शौकीनों के लिए इस साल ज़्यादा पढ़ने वालों के लिए एक खास मंत्र है-पढ़ने के समय से प्रतिबद्ध रहें, मात्रा से नहीं। ज़्यादा किताबें पढ़ने का दबाव अक्सर पढ़ने का आनंद छीन लेता है। शाम को आधा घंटा पढ़ने के लिए अलग रखता हूँ।
जो किताबें उन्हें बाँध नहीं पातीं, उनसे वे जल्दी किनारा कर लेते हैं। अगर कोई किताब पहले 20 पन्नों में आकर्षित नहीं करती, तो उन्हे छोड़ देना चाहिए।
क्या काम करता है-
एक और उपयोगी सलाह है-ध्यान भटकने की योजना पहले से बनाएं। एक-दो मुख्य किताब हमेशा अपने पास रखना चाहिए और एक वैकल्पिक ‘स्नैक’ किताब, ताकि जिसे आप बिना किसी अपराधबोध के बदल सकें।
हैक-
पढ़ने का एक दिखाई देने वाला संकेत बनाना उपयोगी हो सकता है।
इच्छाशक्ति से ज़्यादा माहौल काम करता है-हर बार।”
10. “मैं बेहतर निवेश करूँगा”
लक्ष्य- अपने पैसे को बढ़ाना
अंत में, संकल्पों को निभाने योग्य बनाना सबसे ज़रूरी है। इसके लिए ऐसे संकल्प न बनाएं जो बहुत अधिक इच्छाशक्ति और समय पर निर्भर हों। निवेश के मामले में साल को बेहतर बनाने के लिए उनके कुछ सुझाव हैं-सही एसेट एलोकेशन, जोखिम प्रबंधन और निवेश को ऑटोमेट करना लंबे समय में बेहतर परिणाम देता है।
क्या काम करता है-
बार-बार बाज़ार के स्तर जाँचने से बचना एक अच्छा विचार हो सकता है। जितना कम आप उस पर अटकेंगे, उतने ही कम भावनाओं से प्रेरित फैसले होंगे।
आसान उपाय (Hack it):-
SIP और री-बैलेंसिंग नियम सेट करके जितना संभव हो निवेश को ऑटोमेट करें, ताकि अच्छा व्यवहार अपने-आप हो जाए।
आख़िरकार, नए साल के संकल्पों का उद्देश्य खुद को बदलना नहीं, बल्कि खुद को बेहतर समझना होना चाहिए। जब संकल्प हमारी वास्तविक ज़िंदगी के अनुकूल होते हैं और दृढ़ निश्चय से जुड़े होते हैं, तब वे टिकते हैं।
बदलाव एक दिन में नहीं होता, लेकिन सही दिशा में उठाया गया हर छोटा कदम हमें उस जीवन के करीब ले जाता है, जिसकी हम कल्पना करते हैं।
सन्दर्भः-The Economic Times
