Financial Literacy

Financial Literacy-छोटी उम्र में मिले बड़े सबक

बचपन जीवन का वह चरण है जहाँ व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच और आदतों की नींव रखी जाती है। जैसे बच्चों को बोलना, पढ़ना और लिखना सिखाया जाता है, वैसे ही उन्हें पैसों की समझ भी दी जानी चाहिए। बच्चों को धनराशि के महत्व के बारे में सिखाना एक महत्वपूर्ण कौशल है जो उन्हें वित्तीय स्थिरता और आर्थिक स्वतन्त्रता के लिए तैयार करता है। बच्चों को धनराशि के महत्व के बारे में सिखाना एक ऐसी जीवन-कला है जो उन्हें भविष्य में वित्तीय स्थिरता और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करती है। उन्हें कमाई, बचत, खर्च और बजट जैसी बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराकर आप उन्हें पैसे के साथ बेहतर सांमजस्य विकसित करने में मदद करते हैं जो उन्हें एक ठोस वित्तीय आधार बनाने में सक्षम बनाता है। Financial Literacy जीवन के हर क्षेत्र में उतनी ही जरूरी है जितनी शैक्षणिक साक्षरता।

चाह और जरूरत के बीच का अंतर

बच्चों को Financial Literacy  के महत्व को समझाने और सिखाने से पहले सबसे बड़ा सवाल है- ‘चाह’ और ‘जरूरत’ के बीच अन्तर करने की चेतना और क्षमता। हमें चीजें खरीदने के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन इच्छाओं और जरूरतों के बारे में जागरूकता से सूचित विकल्प बनाने में मदद मिलती है। जीवन के हर चरण में इच्छाएं और जरूरतें अलग-अलग होती है और माता-पिता के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पढ़ने और लिखने की साक्षरता के साथ-साथ Financial Literacy भी शुरू करे। जब बच्चे यह समझ जाते हैं कि हर चीज़ जो वे चाहते हैं, वह जरूरी नहीं है, तब वे समझदारी से खर्च करना सीखते हैं। यही समझ उनके भीतर संतुलित आर्थिक सोच विकसित करती है।

अधिकांश बच्चे ओर किशोर कभी बैंक नहीं गए होते। कई बच्चे एटीम को ही बैंक मान लेते हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार, सात साल की उम्र तक वित्तीय आदतें बन जाती है और इसलिए इसी दौरान विकसित हुई आदतें भविष्य में उनके द्वारा लिए जाने वाले अधिकांश वित्तीय निर्णयों को प्रभावित करती है। अक्सर माता-पिता परेशान होते है कि उनके टीनएजर बच्चे पैसों की अहमिहयत नहीं समझते। इसकी वजह है कि समय रहते उन्हें Saving और Investment के गुुर नहीं सिखाए जातें।

बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिहाज से माता-पिता भरसक प्रयास करते है। जिस प्रकार आप उन्हें सही सामाजिक व्यवहार के बारे में प्रशिक्षित करते हैं। ठीक बैसे ही Financial Literacy  के बारे में भी समय के साथ जागरूक करना आवश्यक हैं। Financial Literacy  केवल घर की नहीं, बल्कि स्कूल और समाज की भी जिम्मेदारी है। पाठ्यक्रम में Financial Literacy  को शामिल करने से आने वाली पीढ़ी आर्थिक रूप से अधिक समझदार और आत्मनिर्भर बनेगी। सन्तान को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के लिए यह अत्यधिक आवश्यक है कि आप उन्हें आज ही वित्तीय तौर पर साक्षर करने के कुछ महत्वपूर्ण कदम उठायें। सन्तान को उसकी आयु के अनुसार उन्हें इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता प्रदान करें। समय के साथ तेजी से बढ़ते वित्तीय विकल्प, महगांई और हानि के बारे में बताकर आप उनके लिए तैयार कर सकते है, मजबूत नीव।

अपनी कमाई को लेने दें सुख

माता-पिता की खर्च करने की आदतों को देखकर और पैसे के बारे में बातचीत सुनकर भी बच्चे पैसे के प्रबन्धन के बारे में सीखते हैं। बच्चों को पैसों की तीन बुनियादी अवधारणाएं सिखानी चाहिए – कमाना, बचाना और खर्च करना। बच्चों को बचत और पैसे की कीमत के बारे में सीखना एक मजेदार और interactive अनुभव हो सकता है। उन्हें उम्र के अनुसार वास्तविक जीवन की स्थितियों, खेलों, कहानियों और पिग्गी बैंक आदि के माध्यम से सिखाया जा सकता है। बचत की आदत डालने के लिए गुल्लक (Piggy Bank) सबसे अच्छा तरीका है। इससे बच्चों में धन प्रबंधन की प्रारंभिक समझ विकसित होती है। कमाई से उनका मतलब यह समझाना है कि पैसा मेहनत से मिलता है, चाहे वह जेबखर्च हो या किसी काम का इनाम। बचत का अर्थ है सारा पैसा तुरंत खर्च न करना, बल्कि कुछ हिस्सा भविष्य के लिए सुरक्षित रखना और खर्च के समय यह सोचना कि कौन-सी चीज़ वास्तव में जरूरी है।

पैसे का उपयोग कैसे किया जाता है, उन्हें यह दिखाने के लिए एक छोटी सी दुकान चलाने जैसे नाटक करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। बच्चों को बजट बनाना एक मनोरंजक खेल की तरह सिखाया जा सकता है। उन्हें उनके जेबखर्च का एक हिस्सा दें और कहें कि वे तय करें कि कितना खर्च करेंगे, कितना बचाएंगे और कितना दान या किसी अच्छे उद्देश्य के लिए रखेंगे। इस अभ्यास से बच्चों में प्राथमिकता तय करने की क्षमता बढ़ती है और वे भविष्य में बेहतर वित्तीय निर्णय लेना सीखते हैं।

Financial Literacy के लिए बजट बनाना सिखाना

इसी तरह उन्हें अपने खिलौने समेटने या घर के छोटे-मोटे काम करने के बदले कुछ सिक्के या पैसे दिये जा सकते हैं। इससे वे कमाई करना सीखेंगें। उनकी बचत से मिलान करके, उन्हें और प्रेरित कर सकते हैं जैसे वे यदि 100 रूपये बचाएगें तो आप उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर 20 रूपये और जोड़ सकते हैं। इसके बाद उन्हें अपनी जरूरत का सामान खरीदने के लिए पर्याप्त बचत करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। अगर वे अपनी बचत से कोई अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं तो इसके लिए प्रशंसा करके उनका मनोबल बढ़ायें। Financial Literacy से जुडें कई खेल है, जैसे मोनोपोली वित्तीय कौशल सिखाने का सबसे पुराना व सबसे पसन्द किये जाने वाला खेल है। यह Loss और Profit को सम्भालने की क्षमता भी सिखाता है। Financial Literacy (वित्तीय साक्षरता) के लिए गये एप भी इस गेम को और भी इन्टरैक्टिव बनाया जा सकता है।

Financial Literacy के लिए उठाएं कुछ महत्वपूर्ण कदम

जब बच्चे इस उम्र में पहुच जाएं कि उनकों बचत और खर्च के बीच का महत्व व अन्तर समझ में आने लगे तो उन्हें भी हर महीने किराना आदि की नियमित खरीदारी के लिये साथ ले जाएं। छुट्टियों की योजना बनाने व माह के अन्त में खर्च जोड़ने आदि के दौरान उन्हें भी साथ बैठाएं। जितना अधिक उन्हें वास्तविक जीवन की स्थितियों से अवगत करांएगे, जिससे उनकी समक्ष और बेहतर होगी। Financial Literacy केवल पैसों के उपयोग की बात नहीं करती, बल्कि यह ईमानदारी, परिश्रम और धैर्य की शिक्षा भी देती है। बच्चों को यह समझाना चाहिए कि पैसा जादू से नहीं, बल्कि मेहनत से कमाया जाता है। जब बच्चे खुद किसी काम से इनाम या छोटी कमाई प्राप्त करते हैं, तो वे उस पैसे की कद्र करते हैं। यह अनुभव उन्हें आगे चलकर मेहनती, ईमानदार और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करता है।

किशारों को यह भी बताया जाए कि आपातकालीन/समेकित निधि को क्यों बनाया जाता है और किस लिए बनाया जाता है। खरीदारी करने से पहले उन्हें रूककर यह आकलन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए कि क्या उन्हे वाकई में उन्हें उस वस्तु की आवश्यकता है ? उनके नाम का एक बैंक आकाउंट खोले तथा उन्हें बैंक की कार्यप्रणाली से भी बच्चे को अवगत करायें। इसके साथ उन्हें बचत का एक छोटा हिस्सा दान करने के लिए भी प्रोत्साहित करें जिससे बच्चे में सहानुभूति और यह विचार विकसित हो कि कुछ पैसों का इस्तमाल दूसरों की मदद के लिए किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

छोटी उम्र में बच्चों को पैसों के प्रति जागरूक बनाना वास्तव में जीवन के सबसे बड़े सबकों में से एक है।
यह केवल पैसा कमाने या खर्च करने की बात नहीं, बल्कि सोचने, निर्णय लेने और जिम्मेदारी निभाने की प्रक्रिया है।
जब बच्चे यह समझ जाते हैं कि पैसा कैसे कमाया, बचाया और निवेश किया जाता है, तो वे आगे चलकर मजबूत और आत्मनिर्भर नागरिक बनते हैं।
Financial Literacy  बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव है।
इसलिए हर माता-पिता और शिक्षक का दायित्व है कि वे उन्हें न केवल पढ़ना-लिखना सिखाएं, बल्कि “पैसे की समझ” भी दें, ताकि वे जीवन के हर मोड़ पर समझदारी से निर्णय ले सकें।

सन्दर्भः-1.  financial litracy book for kids:Maria Kirkland

2. दैनिक जागरण

3. 9 Tips for Teaching Kids About Money

By admin

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